बंगाली फिल्म इंडस्ट्री क्या सिर्फ साउथ के फिल्म को कॉपी करने के ऊपर निर्भर है

हम सब जानते है की बंगाल एक कला और संस्कृति के मामले में बहुत ऊपर स्थान रखता है और फिल्म जगत की बात करे तो इस राज्य ने इस देश को बड़े डायरेक्टर्स, सिंगर, सुपरस्टार्स दिए है. यदि कुछ समय पहले की बात करे तो वेस्ट बंगाल फिल्म इंडस्ट्री ऐसे फिल्मो को बनाती थी जिसकी स्टोरी कही कॉपी की हुई नहीं होती थी लेकिन आज आप १०० में से बंगाल की ९० फिल्मे यदि देखे तो वो आपको साउथ इंडियन फिल्म से कॉपी की हुई मिलेगी। इसका मतलब क्या हम ये समझे की वेस्ट बंगाल में स्टोरी राइटर की कमी है या टैलेंट काम होता जा रहा है जी नहीं ऐसा बिलकुल ही नहीं है बल्कि मई तो ऐसा कहूंगा की बंगाल राइटिंग के मामले में बहुत ऊपर है और बॉलीवुड के भी अधिकतर राइटर बंगाल के ही है।  संशय केबल एक ही है वो की यहाँ की प्रोडक्शन कम्पनिया झोकीम नहीं उठाना चाहती क्योकि उन्हें ऐसा लगता है की यदि वो ओरिजिनल स्टोरीज के साथ फिल्म बनाएगा तो उसे पूरा के लिए ज्यादा टाइम लगेगा और खर्चा भी ज्यादा होगा इसके बजाय यदि कॉपी करके फिल्म बनाये तो फिल्म जल्दी कम्पलीट होगी और खर्चा भी काम होगा साथ ही उनका ऐसा मानना भी है की बंगाल में ऑडियंस की संख्या भी काम है.

अभी हाली में बाहुबली की सक्सेस से ये तो साफ़ हो गया की यदि आपकी फिल्म अछि है तो ऑडियंस की चिंता चोर दे आपको वो पुरे देश मिल जाएगी बस अपनी स्टोरी पे ध्यान दे और फिल्म को अछि बनाये।


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